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Puja & Rituals 3 min read

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का महत्व व सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ

पं. महेन्द्र पाण्डेय
पं. महेन्द्र पाण्डेय
4 Apr 2025
 नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का महत्व व सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ

Introduction to Puja

नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति उपासना का श्रेष्ठ समय होता है। इन नौ दिनों में माँ भगवती की कृपा प्राप्त करने के लिए भक्त उपवास रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। यह पाठ न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है, बल्कि सभी प्रकार की बाधाओं और कष्टों को दूर करने में सहायक होता है।अगर कोई व्यक्ति दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ करने में असमर्थ हो, तो सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ एक उत्तम विकल्प है। इन सात श्लोकों में दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण सार समाहित है, जिससे साधक को देवी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

सप्तश्लोकी दुर्गा मंत्र (Saptashloki Durga Mantra)

शिव उवाच: देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी। कलौ कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः॥

देव्युवाच: श्रृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम्। मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते॥

🔹 सप्तश्लोकी दुर्गा मंत्र: (Saptashloki Durga Path)

1️⃣ ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥

2️⃣ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥

3️⃣ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

4️⃣ शरणागतदीनार्तपरित्राण परायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

5️⃣ सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते। भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

6️⃣ रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नाराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

7️⃣ सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद् वैरिविनाशनम्॥

(इति श्री सप्तश्लोकी दुर्गा सम्पूर्णा)

दुर्गा सप्तशती एवं सप्तश्लोकी दुर्गा का महत्व (Significance of Durga Saptashati & Saptashloki Durga)

🔹 मनोकामनाओं की पूर्ति: सप्तशती और सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ करने से साधक की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

🔹 संकटों से मुक्ति: यह पाठ व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और उसे मानसिक शांति प्रदान करता है।

🔹 नकारात्मक ऊर्जा का नाश: यह पाठ घर और वातावरण को शुद्ध करता है, जिससे नकारात्मक शक्तियाँ समाप्त हो जाती हैं।

🔹 धन, स्वास्थ्य और समृद्धि: देवी महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती की कृपा से साधक को धन-वैभव, अच्छा स्वास्थ्य और विद्या का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

🔹 कर्मों की शुद्धि: यह पाठ व्यक्ति के पिछले जन्मों और इस जन्म के पापों को नष्ट करने में सहायक होता है।

🔹 शत्रुओं पर विजय: सप्तशती पाठ करने से शत्रु पराजित होते हैं और साधक को निर्भयता प्राप्त होती है।

निष्कर्ष

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती या सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ करना अत्यंत शुभ और फलदायक माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति सप्तशती का संपूर्ण पाठ नहीं कर सकता, तो सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ भी देवी की कृपा पाने के लिए पर्याप्त होता है।

इन श्लोकों का नियमित जाप करने से व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि और सुख की प्राप्ति होती है। माँ दुर्गा की भक्ति से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन की सभी परेशानियाँ समाप्त हो जाती हैं।

इस नवरात्रि, माँ भगवती की उपासना करें, सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ करें और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को मंगलमय बनाएं। जय माता दी! 🙏🔱

पं. महेन्द्र पाण्डेय

Written by पं. महेन्द्र पाण्डेय

Expert Vedic Astrologer and Spiritual Guide dedicated to bringing ancient wisdom to the modern world.

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